RS Shandilya Next Blockbuster Poem अहं त्वम वयम | 2019 |


अहं त्वम वयम

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वसुधा के वक्ष पर ऋतुओं ने पंख फैलाए

क्षितिज पर नील गगन में मेघा मुस्कुराए

आदित्य की लालिमा कण कण पर छाए

काश कभी तो ये दृश्य इस धरा पर आए

 

चंद्रमा की किरणों से प्रदीप्त आकाश हो

तृप्त शीतल मनभावन सौम्य प्रकाश हो

नक्षत्रों से आच्छादित रहे ये अंबर अपना

काश प्रकृति का सौंदर्य मन में प्रेम जगाए

 

परन्तु इस सृष्टि की आभा को विकृत किया

विषैले धूम्र रासायनों से वायु को संतृप्त किया

हर श्वास में विषपान को ही नियति बना लिया

काश कोई सोचे धरती मां की कोई राह दिखाए

 

जल थल नभ में प्रदूषण का कूटप्रश्न ज्वलंत

अहं त्वम वयम सब मिलकर करें प्रयत्न

वृक्ष लगाएं वृक्ष लगाएं वृक्ष लगाएं अनन्त

काश यही एक बात सबके मन में बैठ जाए

 

By

RS Shandilya

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