पुत्री

“पुत्री”
एक नन्ही सी परी
छोटी सी जान
जो अपनी मुस्कान से
मन मोह ले
अपनी किलकारी से
सजा दे घर को
जो अपनी आवाज़ से
महका दे दुनिया
जिसके पैरों में
लक्ष्मी का वास हो
जिसे गोद में लेने को
तड़पे ये मन
जिसके स्पर्श के जादू से
तारतम्यता बन जाए
जिसका चेहरा देखकर
वात्सल्य छलक उठे
जो अपनी हंसी से
रौशन कर दे आंगन
जिसका साथ पाने को
लालायित रहें हम
धन्य हुए हम
बिटिया बेटी पुत्री
हमें अभिभावक बनाया
हमारा जीवन खुशियों से भरा
एक परिवार बनाया
अब
नये आयाम छूने हैं
तोड़नी हैं बेड़ियां
संकीर्ण मानसिकता की
बनाना है खुद को
सबल सक्षम अविरल
सूत्रधार बनकर
लाना है बदलाव
पाना है
मान सम्मान प्रतिष्ठा
रचना है
एक नया संसार
सद्भावना का
विश्वास का
बराबरी का
बढ़ानी हैं
क्षमताएं अपनी
असीमित गगन की तरह
चमकना है
सूर्य की तरह
फैलाना है प्रकाश
ज्ञान का
तब ही सार्थक होगा
जीवन तुम्हरा
मेरी पुत्री

“राहुल सूदन” 27.09.2020