चीकू: स्वादिष्ट और पौष्टिकता से भरपूर फल | चीकू की उत्पत्ति | चीकू की खेती | चीकू के पौष्टिक तत्व | चीकू के गुण व उपयोग | उपभोग में सावधानियां

चीकू: स्वादिष्ट और पौष्टिकता से भरपूर फल

भूमिका

बाहर से देखने में चीकू एक मटमैला और बदसूरत सा फल नजर आता है परंतु इसके छिलके के नीचे एक शानदार, स्वादिष्ट एवं पौष्टिकता से भरपूर फल समाया है। चीकू सामान्यतः बाहर से और अंदर से भूरे रंग का होता है। इसमें 2-4 काले रंग के बीच होते हैं और अधिकतर हिस्सा गूदे से भरा होता है। इसे छिलका उतारकर खाने के प्रयोग में लाया जाता है। कई लोग चीकू का नाम सुनकर नाक-भौं सिकोड़ लेते हैं। आइए आज हम चीकू के गुणों के बारे में विस्तार से चर्चा करें।

चीकू की उत्पत्ति

चीकू सैपोटेसी फैमिली का एक बड़ा वृक्ष होता है जिसकी पत्तियां गहरे हरे रंग की होती हैं और उस पर यह भूरे रंग का फल बहुतायत से लगता है। सामान्यतः चीकू गर्म प्रदेश में पाया जाने वाला एक फल है जिसकी आज भूमध्य रेखा के आसपास के देशों में अच्छी खेती होती है। यूं तो चीकू को सबसे पहले मेक्सिको देश में उगाया गया और उसके बाद इसे पूरे विश्व में फैला दिया गया। चीकू को पूरे विश्व में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे सपोटा, ज़पोटा, नीस्पेरो, चेको, नेस बैरी, सेपाडिला, गुदालु, शिमाई, चिकालु आदि। चीकू के पेड़ की विशेष बात यह है कि यह साल में दो बार फल देता है और इसके फूल 12 महीने आते रहते हैं। साथ ही यह 12 महीने हरा-भरा बना रहता है।

इसकी जंगली प्रजाति के वृक्ष 80 से 90 फीट ऊंचे हो सकते हैं यद्यपि आजकल उगाए जाने वाले चीकू के वृक्ष करीब 30 से 40 फुट ऊंचे होते हैं। चीकू का कच्चा फल कड़वा और रुखा होता है और यही फल पकने के बाद रसीला और मीठा हो जाता है। चीकू सामान्यतः 2 से 3 इंच मोटा व स्वादिष्ट गूदे से भरा होता है।

चीकू की खेती

जिनके घर के आस-पास खाली जमीन है या खेत की जमीन है वहां पर चीकू की खेती की जा सकती है। चीकू की खेती के लिए नरम मिट्टी में 3 फुट का गड्ढा खोदकर बीजों को डाला जाता है। बीजों को डालने का सही समय फरवरी-मार्च में होता है। दो पेड़ों के बीच में लगभग 30 फुट का फासला रखना चाहिए ताकि चीकू के पौधे को अच्छी तरह फैलने का मौका मिल सके। नीचे की जमीन में दूसरी फसल जैसे सब्जियां, अनानास या इसी तरह की दूसरी चीजें लगाई जा सकती हैं। चीकू की कुछ ख़ास किस्में भारत में ज्यादातर इस्तेमाल होती हैं जैसे बारामासी, कल्लीपट्टी, गन्धेवी, पिल्लीपट्टी, ढोला दीवानी, क्रिकेट बॉल, छतरी, बहारु आदि।

चीकू के पौष्टिक तत्व

चीकू में प्रचुर मात्रा में आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, पोटेशियम, ज़िंक, सोडियम, कॉपर जैसे खनिज लवण यानि मिनरल तथा विटामिन ए, बी, सी, ई पाए जाते हैं जो हमें स्वस्थ रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। चीकू में उचित मात्रा में फाइबर होता है जो हमारे पेट और आंतों की सफाई का काम करता है। चीकू एक कोलेस्ट्रोल फ्री फल है जो ह्रदय रोगियों के लिए बहुत लाभदायक रहता है। साथ ही इसमें फैट की मात्रा नगण्य होती है।

चीकू के गुण व उपयोग

  1. बीमार व्यक्तियों की रिकवरी के लिए चीकू का सेवन बहुत उपयुक्त माना गया है।
  2. चीकू एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है जिसके कारण यह हमारे शरीर में बहुत सारी बीमारियों से हमारी रक्षा करता है। 3. यहां तक कि कैंसर जैसे जानलेवा रोग में भी चीकू के सेवन को लाभप्रद माना गया है।
  3. इसका मीठा स्वाद बच्चों को बहुत पसंद आता है इसलिए छोटे बच्चों को भी चीकू को मसल कर थोड़ा-थोड़ा खिलाया जाता है या मिल्क शेक के रूप में दिया जाता है जो उनके शारीरिक व मानसिक विकास में सहायक होता है।
  4. कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस आदि का अच्छा सोर्स होने के कारण यह हमारी हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है व हमारी नसों में रुकावट नहीं आने देता।
  5. चीकू के रेगुलर सेवन से हमारे शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की बढ़ोतरी होती है और हमारे खून में आयरन की मात्रा नियंत्रित होती है जिससे हमारे शरीर के सभी अंगों को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिल पाती है और हमें स्फूर्ति का अनुभव होता रहता है।
  6. चीकू में फ्रुक्टोज का मीठापन होता है जिसका सेवन मधुमेह के रोगी भी कर सकते हैं।
  7. चीकू में पाया जाने वाला विटामिन ए आंखों को तन्दरुस्त रखता है तथा आंखों के पीलेपन, थकावट व गंदगी से राहत देता है।
  8. गर्भवती महिलाओं द्वारा चीकू के नियमित सेवन से मां और बच्चे की सेहत में वृद्धि होती है तथा कमजोरी नहीं आती।
  9. चीकू मूत्र प्रवाह को संतुलित करने में सहायता करता है तथा विषैले पदार्थों से किडनी को बचाने में मदद करता है। पथरी के रोगियों द्वारा चीकू के नियमित सेवन से गुर्दे की पथरी निकल जाती है।
  10. चीकू में पाए जाने वाले पौष्टिक तत्व शरीर में बुढ़ापा नहीं आने देते, त्वचा पर झुर्रियां नहीं पड़ने देते, ग्लोइंग स्किन देते हैं व एजिंग प्रोसेस को धीमा कर देते हैं।
  11. चीकू का नियमित सेवन बालों को झड़ने से रोकता है तथा बालों को चमकदार बनाता है।
  12. चीकू हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्यूनिटी को बढ़ाता है जिससे हम कम बीमार पड़ते हैं।
  13. चीकू में उपस्थित फाइबर हमारी छोटी आंत को साफ रखने में मदद करता है जिससे कब्ज़ जैसी समस्या से राहत मिलती है। साथ ही एसिडिटी व पेट में गैस की समस्या को भी दूर करता है।
  14. चीकू हमारे पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव डालता है, मेटाबॉलिज्म रेट को संतुलित करता है जिससे वजन कम करने में सहायता मिलती है।
  15. तनाव यानि डिप्रेशन और चिड़चिड़ेपन को कम करने में चीकू का नियमित सेवन बहुत लाभदायक होता है।
  16. चीकू का सेवन शरीर में होने वाली सूजन यानि इंफ्लेमेशन को कम करने में सहायता करता है जिससे गठिया यानि अर्थराइटिस के रोगियों को आराम मिलता है।

चीकू के उपभोग में सावधानियां

  1. यद्यपि चीकू एक बेहद ही पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक फल है किंतु इसके उपभोग में निम्नलिखित सावधानियां बरतनी जरूरी हैं:
  2. केवल पूर्ण रूप से पका हुआ चीकू ही इस्तेमाल में लाएं। अधपका या कच्चा चीकू खाने से मुंह में छाले हो सकते हैं या पेट में दर्द हो सकता है।
  3. एक दिन में 100 ग्राम से ज्यादा चीकू ना खाएं। आप मध्यम आकार के दो तीन चीकू का सेवन एक दिन में कर सकते हैं।
  4. किसी व्यक्ति को चीकू से एलर्जी भी हो सकती है। यदि चीकू खाने के बाद आपकी तबीयत बिगड़ती है तो कृपया डॉक्टर से परामर्श लें।
  5. चीकू खाने से पहले सावधानी से उसके बीज को अलग कर लें। बीज चिकना होता है तथा फिसल कर गले में जा सकता है जिससे कुछ और परेशानी उत्पन्न हो सकती है।
  6. चीकू काटकर बाद में खाने के लिए ना छोड़ें। बल्कि काटते ही खा लें।
  7. बदबूदार वह पिचके हुए चीकू का सेवन ना करें।

आपको स्वस्थ जीवन की शुभकामनाएं

आर एस शांडिल्य

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नोट: इस ब्लॉग में बताई गई बातें सिर्फ जानकारी के लिए हैं।

लेखक एक प्रशिक्षित व अनुभवी न्यूट्रीशनिस्ट है। डाइट या न्यूट्रीशन से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी मुफ्त पाने के लिए ईमेल करें।