चाय: एक आदत, रवायत, खिदमत या दिक्कत

चाय: एक आदत, रवायत, खिदमत या दिक्कत

चाय क्या होती है

चाय एक झाड़ी नुमा पौधा होता है जिसकी पत्तियों में से एक खास किस्म की खुशबू निकलती है जिसे एरोमा कहते हैं। दुनिया के बहुत सारे लोग चाय की खुशबू और उसके कुछ कसैले से स्वाद के दीवाने हैं। दुनिया भर के देशों में इससे चा, चाह या चाय के नाम से जाना जाता है। हर वर्ष 15 दिसंबर को अन्तर्राष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जाता है जिसमें चाय को एक हेल्थ ड्रिंक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। चाय की पत्तियों से बने पेय पदार्थ को चाय कहते हैं। इसका ज्यादातर उपयोग गर्म चाय के रूप में होता है हालांकि शीतल पेय के रूप में भी इसका प्रयोग किया जाता है। चाय की खोज की शुरुआत में इसका प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता था। परंतु चाय पीने के बाद आने वाली चुस्ती फुर्ती के चलते बाद में इसका प्रचलन पूरे समाज में फैल गया। चाय का वैज्ञानिक नाम कैमेलिया सीनेंसिस है। चाय की खासियत इस बात से समझी जा सकती है कि पानी के बाद चाय ही पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा पिया जाने वाला पेय पदार्थ है। इसका वैज्ञानिक नाम कैमेलिया साइनेन्सिस है। चाय की झाड़ी सालभर हरी ही बनी रहती है। लैटिन भाषा में साइनेन्सिस का अर्थ है “चीन से”।

 

चाय की उत्पत्ति

ऐसा माना जाता है कि चाय की उत्पत्ति हजारों वर्ष पूर्व चीन में हुई। भारत में सर्वप्रथम अंग्रेजों ने सन् 1836 में आसाम में चाय की खेती शुरू कराई। आज चीन के बाद भारत चाय के उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। पूरे विश्व में होने वाली चाय के उत्पादन का आधे से ज्यादा हिस्सा चीन और भारत से आता है। चाय की खेती के लिए गर्म, बरसाती और कुछ ठंडा मौसम आवश्यक होता है। एक और जहां गर्मी और बरसात की वजह से चाय के पौधों में तेजी से वृद्धि होती है वहीं दूसरी ओर ठंडा मौसम चाय में वह खुशबू प्रदान करता है जिसके लिए चाय जानी जाती है। चाय के पौधों को समतल भूमि की अपेक्षा ढलावदार भूमि की आवश्यकता होती है जिससे बरसात का अतिरिक्त पानी बह जाता है और चाय के पौधे को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। ज्यादा तेज धूप से चाय के पौधों को बचाने के लिए थोड़ी थोड़ी दूर पर छायादार वृक्ष लगाए जाते हैं जिससे चाय की उपज अच्छी होती है। भारत में उत्तम प्रकार की चाय की उत्पत्ति केरल के मुन्नार, हिमाचल प्रदेश के पालमपुर, सिक्किम के नामची और दार्जिलिंग में होती है। इसके अलावा और भी बहुत सारे राज्यों में चाय की खेती की जाती है। चाय के पौधों को कमर की ऊंचाई तक ही रखा जाता है जिससे पत्तियां तोड़ने में आसानी रहे। यदि चाय के पौधों को यूं ही छोड़ दिया जाए तो ये 50 फुट तक ऊंचे हो सकते हैं। चाय के पौधों से लगभग दो इंच तक की नयी व कोमल पत्तियां ही तोड़ी जाती हैं।

 

चाय के प्रकार

यूं तो चाय अलग अलग तरह की होती है परन्तु मुख्यत: चाय का विभाजन चार श्रेणियों में किया गया है।

1. सी टी सी ( CTC – Crush, Tear, Curl): दुनिया भर में बिकने वाली चाय का लगभग 90% सी टी सी चाय की श्रेणी में आता है। सी टी सी चायपत्ती बनाने के लिए चाय की हरी व ताज़ा पत्तियों को बेलनाकार रोलर्स द्वारा तोड़ा , मरोड़ा और काटा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान चाय की हरी पत्तियों से फाइटिक अम्ल का रिसाव होता है। यह अम्ल वातावरण की ऑक्सीजन से सम्पर्क में आने पर ऑक्सीकृत (oxidise) हो जाता है तथा चायपत्ती को काला रंग प्रदान करता है। इस प्रक्रिया की समाप्ति पर हमें काले रंग की चायपत्ती के बहुत छोटे छोटे दाने प्राप्त होते हैं जिन्हें उनके आकार के अनुसार अलग अलग डिब्बों में पैक कर दिया जाता है। जब इस चायपत्ती की एक चम्मच उबलते पानी में डाली जाती है तो ये एक गहरा लाल व भूरा रंग तथा एक तीखी खुश्बू छोड़ती है जिसकी सारी दुनिया दीवानी है। लगभग सौ वर्षों से ही सी टी सी चायपत्ती बनाई जा रही है इससे पहले चाय की सूखी पत्तियां ही काम में लाई जाती थीं। सी टी सी चाय को कड़क यानी तीखे व कड़वे स्वाद के लिए पसंद किया जाता है।

 

2. पत्ती: पत्तीदार चाय में पत्तियों की खुशबू सुरक्षित रहती है जिससे यह सी टी सी चायपत्ती की अपेक्षा महंगे दामों पर बिकती है। जहां सी टी सी चाय गर्म पानी में तुरंत अपना रंग छोड़ देती है वहीं पत्तेदार चाय पानी में धीरे धीरे रंग और महक छोड़ती है। पत्तियों में अलग अलग स्वाद व खुश्बू लाने के लिए चाय की पत्तियों को दूसरी चीज़ों जैसे अदरक, इलायची, दालचीनी, लौंग, पुदीना की खुशबु भी मिला दी जाती है।

 

3. चूरा: दानेदार चायपत्ती के बनते समय काफी सारी चायपत्ती का चूरा बच जाता है। इस चूरे को सस्ते दामों पर बेच दिया जाता है। कुछ लोग इस चूरे को बड़े दानों के साथ मिलाकर अच्छे दामों पर बेच देते हैं। इस प्रकार की चाय में ज्यादा कड़वापन होता है जो कुछ लोगों को ज़्यादा पसंद आता है।

4. टी बैग: सभी प्रकार की चाय की अच्छी क्वालिटी निकल जाने के बाद जो बहुत महीन चूरा बच जाता है उससे चाय के टी बैग तैयार किए जाते हैं। इसीलिए टी बैग गर्म पानी डलते ही अपना रंग छोड़ देते हैं। यद्यपि अब टी बैग के क्षेत्र में एक नई क्रांति आ गई है जिसमें अलग अलग क्वालिटी, वैराइटीज व स्वाद की चाय बाजार में उपलब्ध है।

 

आजकल बाजार में कई प्रकार की चाय मिलती है जो किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति हेतु होती है। जैसे आयुर्वेदिक चाय में रसोई घर में उपलब्ध मसालों को मिश्रित कर दिया जाता है जिसमें उपस्थित दालचीनी, लौंग, तुलसी, अश्वगंधा आदि खांसी-ज़ुकाम में फायदा पहुंचाते हैं। सफेद चाय को बहुत कोमल पत्तियों से तैयार किया जाता है जिसमें एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। परन्तु इसके स्वाद में तीखापन नहीं होता जिसके लिए चाय पी जाती है। ऑर्गेनिक चाय के पौधों में रासायनिक खाद व कीटनाशक दवाएं नहीं डाली जाती। वरना यह भी सामान्य चाय की तरह ही होती है। इसी प्रकार स्लिमिंग टी (slimming tea) वजन कम करने के लिए, ग्रीन टी (green tea), बिना दूध के लिए, एंटी स्ट्रेस टी (anti stress tea) तनाव को दूर करने के लिए, रिजुविनेटिंग टी ( rejuvenating tea) शरीर को तरोताजा करने के लिए, मसाला चाय (masala tea) बिना दूध चटपटे स्वाद के लिए, लेमन टी (lemon tea) बिना दूध के खट्टे मीठे स्वाद के लिए इस्तेमाल की जाती है।

 

चाय पीने के तरीके

एक ही प्रकार की चाय को अलग अलग देशों तथा इलाकों में अलग अलग तरह से पिया जाता है। भारत के बर्फीले क्षेत्रों में हरी पत्तियों या काली गर्म चाय में नमकीन मक्खन डालकर इसका सेवन तुरंत गर्मी महसूस करने के लिए किया जाता है। इन इलाकों में कहवा का उपयोग बहुतायत से होता है जिसे बनाने के लिए चाय में इलायची, दालचीनी, केसर, बादाम, अखरोट आदि भी डाले जाते हैं। यहां चाय को छोटी छोटी प्यालियों में पिया जाता है। थोड़ा मैदानी इलाकों में दूध वाली तेज मीठे की चाय का प्रचलन है जिसमें ग्रामीण इलाकों में गुड़ या गुड़ की शक्कर का इस्तेमाल होता है तथा शहरी क्षेत्रों में सफेद चीनी का। यहां आमतौर पर चाय स्टील के गिलास में पी जाती है। और निचले इलाकों में दूध वाली कड़क चाय का प्रचलन है जिसमें अदरक व इलायची को कूटकर डाला जाता है। यहां चाय चीनी मिट्टी से बने बड़े मग में पीने का चलन है। मध्य भारत में मिट्टी से बने कुल्हड़ या छोटे कपों में दूध वाली कड़क चाय पी जाती है। दक्षिण भारत में यूं तो कॉफी पीने का चलन ज्यादा है परन्तु यहां मसाले वाली फ्लेवर्ड चाय (flavoured tea) काफी पसंद की जाती है। जिन इलाकों में ताज़ा दूध की उपलब्धता नहीं हो पाती वहां मिल्क पाउडर (milk powder) से काम चलाया जाता है।

अधिकतर देशों में भारत की ही तरह चाय पी जाती है। कहीं कहीं आइस्ड टी (iced tea) भी पी जाती है खासकर अमेरिका में। अब नयी पीढ़ी के युवाओं में आइस्ड टी के प्रति आकर्षण बढ़ता जा रहा है। यह प्लास्टिक की छोटी बोतल में कोल्ड ड्रिंक की तरह बेची जाती है या बर्फ डालकर पी जाती है।

चाय की खासियत

आखिर चाय में ऐसा क्या है जो इसे दुनिया भर में सबसे ज्यादा पिया जाने वाला पेय पदार्थ बनाता है? यूं तो अधिकतर लोग चाय को उसके कड़क स्वाद के लिए पसंद करते हैं परन्तु इसके साथ और भी बहुत से कारक हैं जो चाय को हमारी ज़िंदगी का एक अभिन्न अंग बनाते हैं।

  1. चाय एक आसानी से उपलब्ध पेय है जो सड़क के ठेले से लेकर पांच सितारा होटल तक किसी ना किसी रूप में मिल ही जाता है।
  2. यारी दोस्ती बढ़ाने के लिए साथ बैठकर चाय की चुस्कियां लेना अब एक आदत बन चुकी है। किसी को भी चाय के बहाने थोड़ा वक्त साथ बिताने के लिए मनाया जा सकता है।
  3. पानी तो एक जरूरी चीज है परन्तु उसके बाद मेहमानों को कम से कम एक चाय पिलाना शिष्टाचार माना जाता है। और इसी प्रकार आपसी संबंध प्रगाढ़ होते हैं।
  4. आर्टिस्ट (artists) व इंटेलैक्चुअल (intellectual) किस्म के लोगों में चाय की महफ़िल जमती हैं जिसमें लंबे विचार विमर्श होते हैं। चाय की लगातार आपूर्ति उन्हें तरोताजा रखती है और उनकी क्रिएटिविटी (creativity) को स्टीमुलेट (stimulate) करती है।
  5. मजदूर, कारीगर, मेहनतकश लोगों में चाय पीना, पिलाना बहुत ज़्यादा प्रचलित है। उनके काम के बीच एक टी ब्रेक उनका हक समझा जाता है।
  6. अधिकतर घरों में दिन की शुरुआत एक अज़ीज़ चाय से होती है। बहुत लोग बैड टी की चुस्कियों के बाद ही शौच जाते हैं। एक बहुत बड़ी आबादी नाश्ते में चाय का सेवन करती है। सुबह की चाय के बाद दिन भर में अलग अलग बहाने से कई बार चाय पी जाती है जैसे – काम ख़त्म हो गया तो चाय, काम करते हुए काफी देर हो गई तो चाय, नया काम शुरू करने से पहले चाय, कोई दोस्त मिल गया तो चाय, थक गए तो चाय, बोर हो रहे हैं तो चाय, मौसम सुहाना हो गया तो चाय, सर्दी बहुत है तो चाय, पकौड़े खा लिए तो चाय, भूख लगी तो स्नैक्स के साथ चाय और फिर शाम की चाय, रात को पढ़ने के लिए चाय, बीमारी में चाय, खांसी ज़ुकाम में चाय आदि।
  7. ऑफिस के माहौल में रिलैक्स करने के लिए अधिकतर अफसर व कर्मचारी चाय का सहारा लेते हैं। हर ऑफिशियल मीटिंग में चाय का इंतजाम किया जाता है। इसके लिए सरकार चाय का रेट भी तय करती है।
  8. कॉलेज की कैंटीन में या फुटपाथ की छोटी सी चाय की दुकान पर एक ही चाय के कई हिस्से जैसे एक बटा दो या एक बटा तीन/ चार करके शेयर किया जाता है।
  9. अक्सर बच्चों को बिस्किट भी चाय में भिगो कर खिलाया जाता है। अमूमन बच्चे चाय नहीं पीते पर दूध की उपलब्धता ना होने की स्थिति में बच्चे भी चाय का सेवन कर लेते हैं।
  10. मंदिरों और गुरुद्वारों में अक्सर, ख़ासतौर पर सर्दियों में, चाय का लंगर लगाया जाता है। इसके अलावा किसी भी धार्मिक आयोजन में चाय को भी शामिल किया जाता है।

इतिहास पर चाय का प्रभाव

ऐतिहासिक घटना “बोस्टन टी पार्टी” का सीधा संबंध चाय से है। आइए, इसको समझने के लिए इतिहास के पन्नों को खंगालते हैं। 1767 ईसवी में इंग्लैंड के कब्जे के सभी उपनिवेशों (colonies) में आयात की जाने वाली हर वस्तु, जिसमें चाय भी शामिल थी, पर जबरदस्ती टैक्स लगा दिया गया। जिसका सभी उपनिवेशों ने पुरजोर विरोध किया। आखिर 1770 में, चाय को छोड़कर, इंग्लैंड को सारे टैक्स खत्म करने पड़े। 1773 में इंग्लैंड ने “टी -एक्ट” पास किया जिसमें एकमात्र “ईस्ट इंडिया कंपनी” को सभी उपनिवेशों में चाय के निर्यात की मंजूरी दे दी, निर्यात शुल्क माफ़ कर दिया और लिया जा चुका कुछ टैक्स कंपनी को वापिस दे देने का प्रावधान भी कर दिया। परन्तु दूसरे व्यापारियों को यह बात नागवार गुजरी और उन्होंने लोकल रेडिकल ग्रुप्स के साथ मिलकर “ईस्ट इंडिया कंपनी” द्वारा सप्लाई की जाने वाली चाय के आर्डर कैंसिल करा दिए। लेकिन बॉस्टन, जो अमेरिका के नगर मैसाचुसेट्स, जहां हार्वर्ड यूनिवर्सिटी है, की राजधानी है, के गवर्नर थॉमस हचिन्संस ने ईस्ट इंडिया कंपनी के जहाजों को बॉस्टन बंदरगाह पर लंगर डालने की और चाय की खेप उतारने की इजाजत दे दी। इस बात से गुस्साए कुछ लोगों ने जहाज पर चढ़कर चाय की 342 पेटियां समुद्र में फेंक दीं। इसी घटना से अमेरिकी क्रांति (American Revolution) की शुरुआत हुई। 1773 में इस चाय की कीमत 18,000 पाउंड थी जो आज सन् 2022 में लगभग तीन मिलियन पाउंड के बराबर है। इस घटनाक्रम के बाद इंग्लैंड ने कड़े कदम उठाते हुए कई दूसरे एक्ट और नियम लागू किए जिनमें से एक बिल द्वारा बॉस्टन बंदरगाह को व्यापार के लिए बंद कर दिया गया। इसके विरोध में सभी उपनिवेशों को साथ आने का अवसर मिल गया और अंततः 2 जुलाई 1776 को अमेरिका ने ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त की।

चाय के फायदे

चाय को विश्व का पानी के बाद पिया जाने वाला पेय पदार्थ बनाने में चाय के फायदों का भी बड़ा हाथ है। चाय का फायदा लेने के लिए 2-4 कप चाय पीना उचित माना गया है। चाय पीने के निम्नलिखित फायदे हैं:

  1. चाय में एंटी ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो हमें स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं।
  2. ग्रीन टी का सेवन दिल की बीमारी से सुरक्षित रखता है तथा कैंसर से लड़ने में भी सहायता करता है।
  3. चाय का सेवन हमारे इम्यून सिस्टम को बल देता है तथा बीमारियों से बचाव करता है।
  4. पेट दर्द व मरोड़ में गर्म चाय का सेवन आराम देता है
  5. शरीर में सूजन या दर्द की शिकायत हो तो चाय आराम पहुंचाती है।
  6. चाय में मौजूद कैफ़ीन मस्तिष्क को अलर्ट रखती है जिससे क्रिएटिव कार्यों को करने में मदद मिलती है।
  7. खांसी ज़ुकाम की स्थिति में गर्म चाय का सेवन आराम पहुंचाता है।
  8. चाय का रोजाना 3-4 कप सेवन हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है तथा बढ़ती उम्र में होने वाले फ्रेक्चर से रक्षा करता है।
  9. दिमागी रोगियों व पार्किनसन्स बीमारी से पीड़ितों में भी चाय लाभ पहुंचाती है।
  10. बिना दूध वाली चाय एल डी एल, बुरे कॉलेस्ट्रॉल (LDL Bad Cholesterol) को कम करती है तथा धमनियों को साफ़ रखने में मदद करती है।
  11. ग्रीन टी वजन को मैनेज करने (weight management) तथा शरीर को डी-टोक्सीफाई (body de-toxification) करने में मदद करती है।
  12. चाय का रेगुलर सेवन चुस्ती फुर्ती प्रदान करता है मन को प्रसन्न रखता है तथा एक लम्बी उम्र जीने का आश्वासन देता है।

चाय के नुकसान

अति हर चीज की बुरी होती है। यही बात चाय पर भी लागू होती है। एक दिन में 4 कप से ज्यादा चाय पीना लाभकारी होने के बजाय नुकसानदेह हो सकता है। ज़्यादा चाय पीने के निम्नलिखित नुकसान हो सकते हैं:

  1. बार बार चाय पीने से एसिडिटी की शिकायत हो सकती है। इस स्थिति में चाय के साथ कुछ नमकीन या बिस्किट का सेवन भी करें।
  2. ज़्यादा चाय पीने से अनिद्रा या बेचैनी हो सकती है। इसके लिए रात का खाना खाने के बाद चाय ना पीयें।
  3. ज़्यादा चाय पीने से शरीर में आयरन का अवशोषण (absorption) कम हो जाता है जिससे थकान व कमजोरी का अनुभव होता है। ऐसे में भोजन करने के तुरंत बाद चाय के सेवन से बचें।
  4. गर्भवती महिलाओं को ज़्यादा चाय के सेवन से बचना चाहिए ताकि भरपूर पोषण बच्चे तक पहुंच सके और उसका स्वास्थ्य अच्छा रहे।


चाय से जुड़े शब्दों के अर्थ

वैसे तो “चाय” अपने आप में एक साधारण सा शब्द है परन्तु इसका अर्थ अलग अलग जगह अलग अलग निकलता है। ऐसे ही कुछ शब्द जो हिन्दी या अंग्रेजी भाषा के हैं और आमतौर पर बोलचाल की भाषा में भारत में बहुतायत से प्रयुक्त होते हैं।

  1. चाय – पानी: चाय -पानी शब्द का एक अर्थ है बख़्शीश मांगना या बख़्शीश देना। मसलन, किसी मजदूर या कारीगर के अच्छे काम से खुश होकर उसके मेहनताने के अलावा दी जाने वाली राशि। चाय -पानी का दूसरा अर्थ है छोटी छोटी रिश्वत देना या रिश्वत मांगना। मसलन, किसी व्यक्ति से कुछ जानकारी निकलवानी हो या आउट ऑफ टर्न कुछ काम कराना हो तो कुछ राशि चाय -पानी के रूप में दी जाती है।
  2. टी: किसी समारोह, मीटिंग या कार्यक्रम के अन्त में “टी” लिखने का अर्थ है कि सभी प्रतिभागियों (participants) के लिए चाय व बिस्किट या अल्पाहार का प्रबंध किया गया है।
  3. हाई – टी: किसी समारोह, मीटिंग या कार्यक्रम के अन्त में “हाई-टी” लिखने का अर्थ है कि सभी प्रतिभागियों के लिए चाय व हैवी स्नैक्स का प्रबंध किया गया है।
  4. चाय – प्रसाद: भारत में परम्परागत तौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु पर की जाने वाली शोक सभा या रस्म-पगड़ी के समापन पर शोकाकुल परिवार की ओर से चाय -प्रसाद का प्रबंध किया जाता है तथा बिरादरी से अनुरोध किया जाता है कि वे इस प्रसाद को ग्रहण करें। इसके पीछे यह मंशा होती है कि परिवार के सदस्य की मृत्यु के बाद भी सम्पूर्ण बिरादरी का हर सुख -दुख में साथ मिलता रहेगा।
  5. चाय पर बुलाना: किसी व्यक्ति या परिवार के बारे में और अधिक जानने के लिए या उनके साथ संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए उन्हें चाय पर बुलाया जाता है। चाय की चुस्कियों के दौरान बातचीत की जाती है जिससे एक दूसरे को समझने का मौका मिल सके।आम आमतौर पर शादी ब्याह के मामलों में इन शब्दों का इस्तेमाल होता है।
  6. चाय पूछना: इसका सीधा अर्थ है आदर सत्कार करना और सम्मान देना। भारत में यदि आप किसी से मिलने जाएं और वो आपको चाय ना पूछे तो इसका अर्थ है कि उसने आपका सम्मान नहीं किया। इससे आपसी संबंधों में खटास आ सकती है।
  7. चाय पर चर्चा: “चाय पर चर्चा” शब्दों का ज्यादातर इस्तेमाल टी.वी. और मीडिया द्वारा किया जाता है। इस प्रकार के प्रोग्राम में किसी विशेष हस्ती को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है और उससे प्रोफेशनल और पर्सनल सवाल पूछे जाते हैं।

चाय के अन्य प्रयोग

  1. चाय पत्ती को इस्तेमाल के बाद गमलों की मिट्टी या क्यारियों में मिला दें। इस प्रयोग से मिट्टी नरम होती है तथा जड़ों में ऑक्सीजन की भरपूर मात्रा पहुंचती है। पौधों का विकास अच्छी तरह होता है तथा फल और फूल में वृद्धि होती है।
  2. शरीर की दुर्गंध को दूर करने के लिए एक लीटर पानी में दो बड़े चम्मच चाय पत्ती अच्छी तरह उबालकर पानी छान लें। ठंडा होने पर इसे एक बाल्टी पानी में मिलाकर नहा लें। सिर्फ बगल या पैरों से आने वाली दुर्गंध के लिए टी बैग को पानी से गीला करके दुर्गंध वाले स्थान पर रखने से फायदा पहुंचता है।
  3. बालों को मुलायम, चमकदार व फुलाने (to make fluffy) के लिए एक लीटर पानी में दो बड़े चम्मच चाय पत्ती अच्छी तरह उबालकर पानी छान कर ठंडा कर लें और इस पानी से बाल भिगोकर थोड़ी देर छोड़ दें। दस मिनट बाद साफ पानी से धो लें। चाहें तो कन्डीशनर लगा कर भी धो सकते हैं। अगर आपके बालों का प्राकृतिक रंग हल्का है तो चायपत्ती की मात्रा कम कर लें वरना चायपत्ती का रंग बालों पर चढ़ सकता है।
  4. आंखों में दर्द, जलन या सूजन की स्थिति में चायपत्ती को गीले कपड़े में लपेटकर या भीगे हुए टी बैग को बंद आंखों पर रखने से आराम मिलता है।
  5. घर में सब्जियों और फूलों के पौधे आसानी से उगाने के लिए उन्हें इस्तेमाल किए हुए टी बैग में डालकर मिट्टी में दबा दें। प्रतिदिन हल्के स्प्रे से पानी दें। बीजों में अंकुरण बहुत जल्दी हो जाएगा।
  6. त्वचा पर होने वाले किसी भी किस्म के दानों, मुंहासों, चकत्तों और रैशिज़ को खत्म करने के लिए उन पर ठंडे भीगे टी बैग रखें।
  7. सफेद छोलों की सब्ज़ी बनाते समय उसमें टी बैग डालकर उन्हें काला भी किया जाता है।
  8. मैजिक टी बैग बनाकर बच्चों को जादू दिखाएं! आइए! समझें। सर्वप्रथम, बच्चों को थोड़ा दूर रखें। दो – तीन टी बैग लें। उसके धागे व स्टैपल को खोलकर चायपत्ती निकाल कर अलग कर लें (और बाद में इससे चाय बनाकर चाय की चुस्कियों का आनंद लें)। अब टी बैग के खोल को पत्थर के फर्श पर खुला हिस्सा नीचे व बंद हिस्सा ऊपर की ओर करके लम्बा खड़ा कर दें। अब ऊपर वाले बंद हिस्से को माचिस से जला दें। आधा हिस्सा जल जाने पर टी बैग ऊपर की ओर उड़ान भरकर भस्म हो जाता है। और आप बच्चों का दिल जीत लेते हैं।

चाय के संदर्भ में दुनिया भर के लोगों का नजरिया भिन्न भिन्न है परन्तु इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि आज चाय का प्रयोग हमारी ज़िंदगी में घुल मिल गया है जिसके बिना एक अधूरापन महसूस होता है। तो देर किस बात की ! उठिए! और अपनी पसन्दीदा चाय की चुस्कियों का आनंद लीजिए।

द्वारा
आर एस शांडिल्य
24.10.2022