हिजाब क्या होता है | हिजाब कौन और क्यों पहनता है | हिजाब पर विवाद

हिजाब क्या होता है | हिजाब कौन और क्यों पहनता है | हिजाब पर विवाद

हिजाब क्या होता है

 

सामाजिक जीवन में पहनने वाले कपड़ों के अलावा धारण किया जाने वाला कपड़ा जो शरीर के बाकी अंगों जैसे बाल, गर्दन आदि को ढक सके, हिजाब कहलाता है। यह एक प्रकार का स्कार्फ होता है। इसका जिक्र कुछ धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। इन धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने के बाद अलग-अलग लोग इसका अलग-अलग अर्थ निकालते हैं। कुछ लोगों को यह लगता है कि हिजाब पहनना धर्म की निशानी है और कुछ को लगता है कि यह ऐच्छिक है। हिजाब का प्रयोग खास तौर पर स्त्रियों द्वारा अपने बदन के खुले हिस्से को ढंकने के लिए किया जाता है। विश्व भर में अलग-अलग देशों में अलग-अलग मान्यताएं हैं। कुछ देशों में हिजाब का उपयोग सिर्फ सिर, गर्दन और छाती का हिस्सा ढंकने के लिए किया जाता है। जबकि कुछ देशों में सर से लेकर पांव तक के शरीर को ढंकने के लिए कपड़े का इस्तेमाल किया जाता है जिसे बुर्का कहते हैं।

हिजाब कौन पहनता है

आमतौर पर मुस्लिम, यहूदी व ईसाई धर्मों में स्त्रियों द्वारा हिजाब पहनने का प्रचलन है। एक तरफ मुस्लिम देश ईरान में स्त्रियों द्वारा हिजाब पहनना कानूनन अनिवार्य है। वहीं दूसरी ओर दूसरे मुस्लिम देशों में यह ऐच्छिक है। अधिकतर विकसित देशों में या तो हिजाब पहनने पर पूर्णतया पाबंदी है और या यह ऐच्छिक है। परंतु दोनों ही स्थितियों में यह सभी नियम सामान्यतः स्त्रियों पर ही लागू होते हैं। आमतौर पर छोटी लड़कियां हिजाब नहीं पहनतीं और जवानी के समय से ही वे हिजाब पहनना शुरू करती हैं। पुराने समय में अरब देशों की धनवान स्त्रियां हिजाब पहनती थी ताकि वे दूसरी स्त्रियों से अलग दिख सकें। पाश्चात्य सभ्यता के चलते हिजाब कहीं खो सा गया था। परंतु पिछले कुछ सालों में कई देशों में हिजाब को पहनने और ना पहनने पर काफी प्रदर्शन हुए हैं। हिजाब पहनने के समर्थकों ने 1 फरवरी को इंटरनेशनल हिजाब डे घोषित किया है। वहीं दूसरी ओर हिजाब की ख़िलाफत करने वाले लोगों ने 1 फरवरी को नो हिजाब डे घोषित किया है।

हिजाब क्यों पहना जाता है

हिजाब को शिष्टाचार पूर्वक पहना जाता है। ऐसा माना जाता है कि स्त्रियों को अपने परिवार के अलावा बाकी लोगों से मुलाकात करते समय हिजाब पहनकर ही मिलना चाहिए। जिससे कोई अनजान व्यक्ति उनकी ओर आकर्षित न हो सके। विश्व भर में स्त्रियों ने अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग प्रकार के कपड़ों को अपने परिधानों के ऊपर पहना है जैसे चुनरी, शाल, घूंघट जिसका मकसद भी पर्दा करना है। हालांकि पर्दा प्रथा अब अधिकांश स्थानों पर बंद हो चुकी है परन्तु हिजाब का प्रयोग अभी तक विवादास्पद बना हुआ है।

हिजाब पर विवाद




ईरान की इंकलाब स्ट्रीट पर हिजाब के खिलाफ लगातार कई सालों से प्रदर्शन हो रहे हैं। विदा मोवाहेद नामक एक ईरानियन लड़की ने 27 दिसंबर 2017 को इंकलाब स्ट्रीट पर अपना हिजाब उतारकर एक झंडे की तरह लहराया। विदा मोवाहेद “इंकलाब वाली लड़की” के नाम से मशहूर हो गई। पिछले कुछ सालों में इन “गर्ल्स ऑफ एंकेलाब” यानि “इंकलाब वाली लड़कियां” के नाम से मशहूर स्त्रियों को हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन के लिए हिरासत में लिया गया है। इस प्रकार की घटनाओं पर एम्नेस्टी इंटरनेशनल व दूसरी ह्यूमन राइट्स संस्थाओं ने अपना विरोध जताया है। परन्तु ईरान में  1979 के इस्लामिक रिवोल्यूशन के बाद हिजाब ना पहनना कानूनन जुर्म घोषित कर दिया गया है। हिजाब ना पहनने की स्थिति में स्त्रियों को दस दिन से दो महीने तक कैद और/ या पचास हजार रियाल से पांच लाख रियाल तक के जुर्माने का प्रावधान है।

एक दूसरे मुस्लिम देश सऊदी अरब में भी कुछ स्त्रियों ने “हिजाब अन्डर माई फुट” नाम से 2018 में एक अभियान चलाया जिसमें उन्होंने हिजाब के विरोध में अपना पक्ष रखा।

भारत में हिजाब पर विवाद उडुपी, जो कर्नाटक राज्य का एक जिला है, से शुरू हुआ। यूं तो उडुपी को समुद्र बीच (Beaches), मंदिर (Temples), वन्य जीवन ( wild life), लोक उत्सव (Folk Festivals) और शैक्षणिक संस्थानों (Educational Institutes) के लिए जाना जाता है पर हिजाब विवाद में भी इस शहर का नाम जुड़ गया जब कुछ लड़कियों ने हिजाब पहनकर कॉलेज में प्रवेश करना चाहा परन्तु कॉलेज के अधिकारियों द्वारा अनुमति नहीं दी गई। इस पर उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और इसे अपना अधिकार बताया। धीरे धीरे यह मामला तूल पकड़ता गया और पूरे देश में हिजाब के पक्ष और विपक्ष में प्रदर्शन होने लगे। इसी दौरान कॉलेज की लड़कियों ने कोर्ट में याचिका दायर कर दी और अपने हिजाब पहनने के अधिकार को सुरक्षित करने की मांग की। 15 मार्च 2022 को कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह याचिका खारिज करते हुए एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में यूनिफॉर्म के महत्व को बरकरार रखा। कुछ लोगों ने जहां इस फैसले का स्वागत किया है वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने उनके धार्मिक अधिकारों का हनन बताया है। गौरतलब रहे कि भारत में हिजाब विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है।

by

RS Shandilya

15.03.2022