प्लास्टिक – एक समस्या या निदान

प्लास्टिक एक समस्या या निदान

प्लास्टिक क्या है

“प्लास्टिक” शब्द की शुरुआत बेल्जियम के रसायन शास्त्री लियो बेकलैंड द्वारा की गई थी। उन्होंने ही 1907 में “बैकेलाइट” का आविष्कार किया जिसके लिए उन्हें “प्लास्टिक उद्योग के पिता” के रूप में भी जाना जाता है। बैकेलाइट का उपयोग आज भी बिजली के स्विच में किया जाता है।

“प्लास्टिक” सिंथेटिक पॉलिमर के बहुत अधिक आणविक द्रव्यमान वाले अणुओं की एक लंबी श्रृंखला है। यह आमतौर पर पेट्रोलियम उद्योग के माध्यम से उत्पन्न होता है।

सिंथेटिक पॉलिमर, बहुत छोटे छोटे अणुओं वाले मोनोमर्स से बनते हैं। मोनोमर्स ही खुद या अन्य रसायनों के साथ मिलकर पॉलिमर की लंबी श्रृंखला बनाते हैं।  श्रृंखला में मुख्य घटक कार्बन होता है।  सिंथेटिक मोनोमर्स टेफ्लॉन, पीवीसी, पॉलिथीन आदि बनाते हैं।

पॉलिथीन क्या है?

पॉलिथीन एथिलीन से बना है जो एक हाइड्रोकार्बन है (जिसका अर्थ है कि यह हाइड्रोजन और कार्बन परमाणुओं का एक संयोजन है)।  पेट्रोकेमिकल उद्योग में एथिलीन का उत्पादन किया जाता है।  उसी एथिलीन का उपयोग रासायनिक हथियारों में भी किया जाता है जैसे – मस्टर्ड गैस।

पॉलिथीन के प्रकार

पॉलिथीन के विभिन्न प्रकार होते हैं जिनका भौतिक और रासायनिक गुणों के आधार पर विभिन्न प्रकार के उपकरणों और प्रक्रियाओं में उपयोग किया जाता है।

अति उच्च आणविक भार वाले पॉलीथीन का उपयोग मशीनों, जहाजों, कृत्रिम जोड़ों, चिकित्सा प्रत्यारोपण, गियर, बियरिंग्स, बुलेटप्रूफ जैकेट आदि में किया जाता है।

इसके बाद उच्च घनत्व वाली पॉलीथीन आती है जिसका उपयोग डिब्बे, कंटेनर, बोतलें, पानी के पाइप आदि बनाने में किया जाता है।

मध्यम और निम्न घनत्व वाली पॉलिथीन का उपयोग गैस पाइप, पैकेजिंग सामग्री, कैरी बैग, फिल्म, बैग, चादरें, खिलौने, केबल के लिए कवर, फिल्म रैप आदि में किया जाता है।

बहुत कम घनत्व वाली पॉलिथीन का उपयोग भोजन के आवरण, खाद्य पैकेजिंग, जमे हुए भोजन के आवरण, कैरी बैग आदि बनाने के लिए किया जाता है।

पॉलिथीन के फायदे

पॉलिथीन का ज्यादातर उपयोग पैकेजिंग में किया जाता है जिसके बहुत फायदे होते हैं।

  1. यह काफी हल्का होता है जिससे पैकेज की गई वस्तु का भार नहीं बढ़ता।
  2. यह दूसरे पैकेजिंग मैटीरियल की अपेक्षा बहुत सस्ता पड़ता है।
  3. इसमें कागज़, गत्ते, धागे आदि की तुलना में खिंचाव क्षमता (इलास्टिसिटि) ज़्यादा होती है।
  4. प्लास्टिक अधिकतर कैमिकल्स के साथ क्रिया नहीं करता जिसके कारण कांच की अपेक्षा प्लास्टिक में उनके भंडारण में अधिक सुविधा होती है।
  5. प्लास्टिक से बनी वस्तुएं ज्यादा टिकाऊ होती हैं तथा सालों साल तक उनका प्राकृतिक क्षय नहीं होता।
  6. पॉलिथीन की परत चीज़ों को पानी के संपर्क में आने से बचाती है तथा उन्हें सुरक्षित रखती है।
  7. द्रव्य पदार्थ को पॉलिथीन में बन्द करके आसानी से रखा जा सकता है तथा एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जाया जा सकता है।
  8. खासतौर से पैकेजिंग इंडस्ट्री में प्लास्टिक का योगदान बहुत ज्यादा है क्योंकि पॉलिथीन को आवश्यकता अनुसार किसी भी आकार में ढाला जा सकता है।
  9. प्लास्टिक ने, लोहे या दूसरी धातुओं से बनी वस्तुओं, जो या तो बहुत भारी होती थीं या उनमें जंग लगने की शिकायत थी, को नया आयाम दिया है। इसी प्रकार मिट्टी या पत्थर से बनी वस्तुएं जो एक झटका लगने से टूट जाती थीं, उनको प्लास्टिक ने एक नयी पहचान दी है।
  10. दूसरे पदार्थों की अपेक्षा प्लास्टिक को री-साईकिल (पुराने प्लास्टिक से नया प्लास्टिक बनाना) करना सुगम व सस्ता है तथा इसमें कम ऊर्जा का इस्तेमाल होता है।

पर्यावरण के लिए खतरा बना पॉलीथिन

इतनी विशेषताओं के बावजूद प्लास्टिक पर्यावरण के लिए खतरा बन रहा है क्योंकि पॉलीथिन बायोडिग्रेडेबल नहीं है और इसलिए जल निकायों और लैंडफिल में जमा हो जाती है।  साथ ही यह घरेलू पशुओं और समुद्री जीवों द्वारा निगल लिया जाता है।  ये पशु उत्पाद पॉलीथिन से प्रदूषित हो जाते हैं और इसका एक हिस्सा मनुष्यों में मिल जाता है जिससे उनके लिए स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा हो जाता है।

हालांकि, नई सफलताओं से पता चलता है कि कुछ जीवाणु हैं जो या तो पॉलीथिन को भोजन के रूप में उपयोग करने में सक्षम होंगे या इसे अन्य बायोडिग्रेडेबल पदार्थों में तोड़ सकते हैं।

प्लास्टिक मलबा

इसके बावजूद, नई तकनीक और आविष्कारों का उद्देश्य प्लास्टिक की बढ़ती प्रवृत्ति से निपटना है, दुनिया इस ग्रह के हर नुक्कड़ पर फैले प्लास्टिक के ढेरों को देख रही है।  भारत में, प्लास्टिक कचरा बीनने वालों द्वारा एकत्र किया जाता है और पुनर्चक्रण के लिए कारखानों को बेचा जाता है।  हालांकि, वे प्लास्टिक या पॉलिथीन के छोटे टुकड़े नहीं उठा सकते।  और ये छोटे-छोटे टुकड़े या तो लैंडफिल में टिके होते हैं या नालों में नदियों और समुद्र में ले जाया जाता है।  किसी भी तरह से ये हमारे ग्रह के वनस्पतियों और जीवों के लिए खतरा पैदा करते हैं।

 

प्लास्टिक प्रतिबंध पर भारत सरकार का कानून

भारत में प्लास्टिक बैन पर कोई आम नीति नहीं है।  कुछ राज्यों ने प्रतिबंध को गंभीरता से लिया है और इसे लागू किया है।  लेकिन कुछ अन्य राज्यों ने अभी इस पर कोई फैसला नहीं लिया है।  भारत सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन सिंगल यूज प्लास्टिक क्या है यह नागरिकों के विवेक पर छोड़ दिया गया है। आम आदमी के लिए यह समझना जरूरी है कि बहुत पतली पॉलिथीन व बहुत पतला प्लास्टिक इस बैन में शामिल है। प्लास्टिक से बनी यूज़ एण्ड थ्रो वाली प्लेट, दोने , चम्मचों के इस्तेमाल को बन्द करें।

अधिकांश भारतीय राज्यों ने 75 माइक्रो मीटर (75 माइक्रोन) से कम मोटाई के सिंगल यूज पॉलिथीन बैग पर प्रतिबंध लगा दिया है तथा आने वाले समय में इसे 120 माइक्रोन तक ले जाने का विचार है।  लेकिन अधिकांश जगहों पर इसे ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है।

पॉलीथिन बैग के उपयोग के बुरे प्रभावों और पैकेजिंग सामग्री के रूप में पॉलीथिन के उपयुक्त विकल्प के बारे में जन जागरूकता आम आदमी को पॉलीथिन बैग के उपयोग से दूर रहने के लिए प्रेरित कर सकती है।

 द्वारा

 आर एस शांडिल्य

 

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